“माय फ्रेंड बुशी “
“माय फ्रेंड बुशी “ मेरा रोना रुक नहीं रहा था, मेरा प्यारा ‘बुशी’ जिसने मुझे इतना प्यार दिया, न जाने कितनी सीख दीं, आज एक ट्रक के द्वारा कुचले जाने के पश्चात् मुझे छोड़ कर चला गया. बुशी एक बहुत ही झबरा कुत्ता था और न जाने कहाँ से आ कर मेरे पैरों में आकर लिपट गया, उस समय मैं लगभग 10 वर्षों का रहा होउंगा. माता पिता कुता पालने के अनिच्छुक थे , मेरी कोई भी जिद्द उन को न मना सकी, लेकिन बुशी का प्यार मेरे प्रति कभी कम न हुआ . अपने खाने में से बचा के मैं उसको चुप चाप खाना देता रहा और वो भी चुप-चाप उसे स्वीकारता रहा। मुझे नहीं पता वह कहाँ रहता था पर खाने के समय वो हाजिर हो जाता था। इस बीच ऐसा हुआ कि हमें अपना घर किसी दूसरे मोहल्ले में लेना पडा जो कि वर्तमान घर से कम से कम पांच किलोमीटर दूर रहा होगा। मेरा बुशी के प्रति प्यार और उसकी स्वामिभक्ति देखकर मेरे घरवाले उसे नए घर में साथ ले आये.अब वो हमारे साथ ही रहता था . एक बार मैं दूध लेने डेरी पर गया तो देखा कि दूध निकलने में अभी देर है , तो दूधवाले का बेटा जो मेरा सहपाठी था, उसके साथ गप्पें मारते मारते, हम दोनों पास के ही किसी दूसरे गाँव...